झिलमिलाते झरने
गागर में सागर सी बूंदें
तेरी हिमशिखाओं से पिघलकर
खुलते झरनों के द्वार।
मदहोश करते सबको
तेरी अनुपम छटाएं
दिल होता बाग बाग।
ऊंंचाई इतनी तेरी
कि नाप नही सकते
बस दो नैनो से
ताकती तेरी सुंदरता अपार।
झिलमिलाते चाँदी से
हरे भरे पन्ने
दिल चाहता लिखूं बार बार।।
तेरी हिमशिखाओं से पिघलकर
खुलते झरनों के द्वार।
मदहोश करते सबको
तेरी अनुपम छटाएं
दिल होता बाग बाग।
ऊंंचाई इतनी तेरी
कि नाप नही सकते
बस दो नैनो से
ताकती तेरी सुंदरता अपार।
झिलमिलाते चाँदी से
हरे भरे पन्ने
दिल चाहता लिखूं बार बार।।
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