मायका
नस नस में रचा बसा हंसता गुदगुदाता आनंदित करता पल पल की याद दिलाता। खट्टे मीठे नोक झोंक आज होंठों पर मुस्कान है लाता। आंगन की सौंधी-सौंधी महक माँ के हाथ की खुशबू और रसोई की बघार भूख से बेबस कर जाता। आज भी सपने में मायके का वहीं बिछौना दिल को बडा तडपाता। ममता की चौकट लांघ ससुराल के द्वार तक आना याद बहुत आता है मुझको मेरे मायके का वह गुजरा जमाना।।