मै क्या हूँ ?
मै क्या हूँ ?
मोहन की बंसी
या फिर श्याम की राधा
या फिर तपते मरूस्थल में
पीपल की ठंडी छाँव।
मै क्या हूँ ?
तुम्हारे प्रेम की नैया
या फिर हूँ पतवार
या फिर तुम्हारे मन का आधार
या फिर हूँ निराकार।
मै क्या हूँ ?
फूलों की खुशबू
या फिर कांटों की चुभन
या फिर हूँ
तुम्हारे गले का हार ।।
मोहन की बंसी
या फिर श्याम की राधा
या फिर तपते मरूस्थल में
पीपल की ठंडी छाँव।
मै क्या हूँ ?
तुम्हारे प्रेम की नैया
या फिर हूँ पतवार
या फिर तुम्हारे मन का आधार
या फिर हूँ निराकार।
मै क्या हूँ ?
फूलों की खुशबू
या फिर कांटों की चुभन
या फिर हूँ
तुम्हारे गले का हार ।।
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