मृत्यु
रे ! चंचल मन,कर ले थोडा विराम्
थक गया होगा तू भी,
कर ले आराम्।
फिर सोच जरा, स्थिर भाव से,
धर्म क्या, अधर्म क्या?
सत्य क्या, असत्य क्या ?
है एक कटुवचन,
क्या अहं करना इस तन पर
मिट्टी से बना जो
फिर एक दिन मिट्टी में
हैं मिल जाना।
मौत है एक सच्चाई
हर दिन होती जिसकी विदाई।।
रे ! चंचल मन,कर ले थोडा विराम्
थक गया होगा तू भी,
कर ले आराम्।
फिर सोच जरा, स्थिर भाव से,
धर्म क्या, अधर्म क्या?
सत्य क्या, असत्य क्या ?
है एक कटुवचन,
क्या अहं करना इस तन पर
मिट्टी से बना जो
फिर एक दिन मिट्टी में
हैं मिल जाना।
मौत है एक सच्चाई
हर दिन होती जिसकी विदाई।।
Comments
Post a Comment