अंधा मजहब

मजहब के नाम पर मरने-मिटने वालों,
पहले यह तय करो,आज तुम रहीम हो तो
कल तुम्हारा नाम राम न होगा।
मजहब के नाम पर हिंसा फैलाने वालों,
पहले यह तय करो,
आज जो मस्जिद खुदा का घर है तुम्हारा,
कल तुम्हारा सिर किसी मंदिर में न झुकेगा ।
मजहब के नाम पर मासूम जिंदगियों की बलि चढाने वालों
पहले यह तय करो,
जिस जुबान से आज तुम कुरान-ए-शरीफ की नज्में पढते हो
कल उस जुबान पर गीता का श्लोक न होगा।
मजहब की आड़ में अपनी ही जमीं का सौदा करने वालों
पहले यह तय करो,
आज जिस मुस्लिम का घर आशियाना है तुम्हारा
कल फिर तुम्हारा जन्म हिंदू के घर न होगा।।

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