धर्म क्या है ?

धर्म क्या है ?
ईश्वर की वन्दना
पूजा या अर्चना
या फिर वेदों की उद्घोषणा,
नहीं यह धर्म नही।
धर्म है
एक सामाजिक प्राणी का
दूसरे मनुष्य के प्रति,
धर्म किसी के स्वयं की पहचान नहीं
धर्म कर्तव्य है
एक भूखे मनुष्य को
भोजन कराना,
धर्म है
एक निर्वस्त्र को
वस्त्र धारण कराना,
धर्म वेदों की उद्घोषणा नही
धर्म है,कर्तव्यों का निर्वाह,
धर्म है आचार
धर्म है हमारे विचार।
धर्म का अर्थ
किसी मनुष्य पर थोपना नही है
धर्म है इक आस्था
जो किसी के भी प्रति हो सकती है
चाहे वह पत्थर से निर्मित
कोई आकृति हो
या फिर चाहे,
हमारे मन के अंदर छिपी
एक कल्पना।
बस अन्तर है
हमारी सोच का।
कोई गीता को धर्म मानता है
तो कोई बाइबिल, कुरान को।
कोई भगवान को पूजता है
तो कोई इंसान को,
पर, वास्तविक धर्म तो पर्याय है,
कर्म का।।




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