चीरहरण
जन्म से अंधे थे धृतराष्ट्र
पर श्रवण शक्ति थीं उनके पास
किंतु भरी सभा में
पंचाली को दाव पे लगाने वाले थे धर्मराज
पुत्र मोह में भी अंधे थे धृतराष्ट्र
पर राजा के कर्तव्य का भी किया तिरस्कार
क्यों हुआ द्रौपदी का चीर-हरण ?
कैसे हुआ था दुस्सासन का विकास ?
कहते हैं दोषी थी स्वयं द्रौपदी
दुर्योधन पर किया था अट्टहास
कैसा है यह निर्लज्ज समाज ?
सदियों से स्त्री के गर्भ में पलता
और सदा स्त्री को ही कलुषित करता
करता स्त्री पर ही अत्याचार
छल तो हर युग में हुआ
कभी सीता के साथ
तो कभी द्रौपदी के साथ
कलुषित होती रही स्त्रियां
कभी धर्म के नाम पर
कभी छोटे वस्त्र के नाम पर
दुस्सासन और रावण
तब भी थे और अब भी हैं
सत्ता कैसी भी हो,
कोई भी हो
सत्ता से समाज का परिवर्तन नहीं
सोचनीय हैं,
स्त्रियों की असुरक्षित अस्मिता
और मान-सम्मान।।
पर श्रवण शक्ति थीं उनके पास
किंतु भरी सभा में
पंचाली को दाव पे लगाने वाले थे धर्मराज
पुत्र मोह में भी अंधे थे धृतराष्ट्र
पर राजा के कर्तव्य का भी किया तिरस्कार
क्यों हुआ द्रौपदी का चीर-हरण ?
कैसे हुआ था दुस्सासन का विकास ?
कहते हैं दोषी थी स्वयं द्रौपदी
दुर्योधन पर किया था अट्टहास
कैसा है यह निर्लज्ज समाज ?
सदियों से स्त्री के गर्भ में पलता
और सदा स्त्री को ही कलुषित करता
करता स्त्री पर ही अत्याचार
छल तो हर युग में हुआ
कभी सीता के साथ
तो कभी द्रौपदी के साथ
कलुषित होती रही स्त्रियां
कभी धर्म के नाम पर
कभी छोटे वस्त्र के नाम पर
दुस्सासन और रावण
तब भी थे और अब भी हैं
सत्ता कैसी भी हो,
कोई भी हो
सत्ता से समाज का परिवर्तन नहीं
सोचनीय हैं,
स्त्रियों की असुरक्षित अस्मिता
और मान-सम्मान।।
Comments
Post a Comment