नीला आसमां

मौसम दर मौसम
तुम्हारी विशिष्टता लुभाती
प्रातःचमकीला नीला
तो दोपहर
हरित मणी रंग सा
तू तो पूरे दिन
रंग बदलता
सूर्योदय में पीला, गुलाबी
तो सूर्यास्त में
चमकदार नारंगी
तुम्हारा स्वभाव भी
हम मनुष्यों सा बदलता
गर्मी में खिली-खिली धूप
तो बरसात में
काले मेघ सा
मल्हार गाता
तेज धूप से थकता
तो चांदनी रात में
शीतलता छलकाता
अनगिनत मंदाकिनियों में
छुपा मंद-मंद मुस्काता ।।

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