मान-मर्यादा
जिस देश की नदियांं बहती है
गंगा-यमुना और सरस्वती के नाम पर
फिर भी सदा प्रहार हुए
इन्हीं के स्वाभिमान पर
जहाँ गार्गी और विद्योत्तमा जैसी विदुषियां
फिर भी उनका मार्ग अवरुद्ध होता
मान-मर्यादा और चूल्हा चौका के नाम पर
इतिहास में लक्ष्मीबाई भी युद्ध लडी
अंग्रेजों से, पुत्र को पीठ पर बांध कर
किंतु आज की स्त्री युद्ध करती हर पल
कभी दहेज तो कभी घरेलू हिंसा के नाम पर
ऐ अभिमानी, ना इठलाओ
अपनी पुरुष प्रधान सत्ता पर
आज की सीता धरती मे नही
कल्पना से यथार्थ तक पहुंच चुकी है चांद पर।।
गंगा-यमुना और सरस्वती के नाम पर
फिर भी सदा प्रहार हुए
इन्हीं के स्वाभिमान पर
जहाँ गार्गी और विद्योत्तमा जैसी विदुषियां
फिर भी उनका मार्ग अवरुद्ध होता
मान-मर्यादा और चूल्हा चौका के नाम पर
इतिहास में लक्ष्मीबाई भी युद्ध लडी
अंग्रेजों से, पुत्र को पीठ पर बांध कर
किंतु आज की स्त्री युद्ध करती हर पल
कभी दहेज तो कभी घरेलू हिंसा के नाम पर
ऐ अभिमानी, ना इठलाओ
अपनी पुरुष प्रधान सत्ता पर
आज की सीता धरती मे नही
कल्पना से यथार्थ तक पहुंच चुकी है चांद पर।।
कविता काफी समय से लिखती आरही पर अब अपना ब्लॉग बनाई हूँ।पसन्द आने पर प्रतिक्रिया अवश्य व्यक्त करें।
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